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एड्स महामारी का इतिहास
एड्स (AIDS) का इतिहास केवल एक बीमारी की कहानी नहीं है, बल्कि यह विज्ञान, संघर्ष और मानवीय जज्बे की एक लंबी यात्रा है। 1980 के दशक में शुरू हुई यह महामारी आज एक प्रबंधनीय स्थिति (manageable condition) तक पहुँच चुकी है। एड्स महामारी का इतिहास: सन्नाटे से समाधान तक का सफर HIV/AIDS ने पिछले चार दशकों में दुनिया को जिस तरह से बदला है, वैसा किसी और आधुनिक बीमारी ने नहीं किया। आइए जानते हैं इस महामारी के कुछ महत्वपूर्ण पड़ाव: रहस्यमयी शुरुआत (1981-1983) इस महामारी की आधिकारिक शुरुआत 5 जून, 1981 को मानी जाती है, जब अमेरिका के CDC (Centers for Disease Control) ने फेफड़ों के एक दुर्लभ संक्रमण के कुछ मामलों की रिपोर्ट दी। शुरुआत में इसे केवल एक विशिष्ट समूह की बीमारी माना गया, लेकिन जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि यह वायरस किसी को भी प्रभावित कर सकता है। वायरस की पहचान (1983-1984) 1983 में, पेरिस के पाश्चर इंस्टीट्यूट के डॉ. ल्यूक मॉन्टेनियरे और उनकी टीम ने उस वायरस की खोज की जो एड्स का कारण था। बाद में इसे HIV (Human Immunodeficiency Virus) नाम दिया गया। डर और कलंक का दौर (1980 का दशक) शुरुआती वर्षों में, इस बीमारी को लेकर समाज में भारी डर और भ्रम था। लोग मरीजों से हाथ मिलाने या पास बैठने में भी डरते थे। इसी दौरान रयान व्हाइट जैसे युवाओं और एलिजाबेथ टेलर जैसी हस्तियों ने इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने में बड़ी भूमिका निभाई। विज्ञान की जीत: ART का उदय (1990 का दशक)…
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