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    कंडोम और एचआईवी की रोकथाम ?

    एचआईवी (HIV) की रोकथाम में कंडोम सबसे सुलभ और प्रभावी हथियारों में से एक है। चिकित्सा शोधों के अनुसार, जब कंडोम का उपयोग सही तरीके से और हर बार किया जाता है, तो यह एचआईवी संचरण (Transmission) के जोखिम को 90% से 95% तक कम कर सकता है। यह न केवल अनचाहे गर्भ को रोकता है, बल्कि अन्य यौन संचारित रोगों (STIs) जैसे गोनोरिया और सिफलिस से भी सुरक्षा प्रदान करता है। क्या एचआईवी वायरस कंडोम के छेद से निकल सकता है? नहीं। अच्छी गुणवत्ता वाले लेटेक्स (Latex) या पॉलीयुरेथेन (Polyurethane) कंडोम में ऐसे कोई छेद नहीं होते जिनसे एचआईवी वायरस गुजर सके। हालांकि, ‘लैमस्किन’ (Lambskin) या प्राकृतिक झिल्ली वाले कंडोम में सूक्ष्म छिद्र हो सकते हैं, इसलिए एचआईवी से बचाव के लिए हमेशा लेटेक्स या सिंथेटिक कंडोम का ही चुनाव करें। कंडोम इस्तेमाल करने के बावजूद एचआईवी होने का खतरा कब होता है? कंडोम तभी विफल होता है जब उसका उपयोग गलत तरीके से किया जाए। इसके मुख्य कारण हैं: ·        संभोग के दौरान कंडोम का फट जाना या खिसक जाना। ·        कंडोम के साथ तेल आधारित लुब्रिकेंट (जैसे वैसलीन, तेल या लोशन) का उपयोग करना, जो लेटेक्स को कमजोर कर देते हैं। ·        कंडोम को संभोग के बीच में पहनना या बहुत जल्दी उतार देना। ·        एक्सपायर्ड (पुराना) कंडोम इस्तेमाल करना। क्या दो कंडोम एक साथ पहनने से सुरक्षा दोगुनी हो जाती है? बिल्कुल नहीं! कभी भी एक साथ दो कंडोम न पहनें। दो कंडोम के बीच होने वाला घर्षण (Friction) उनके फटने की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है। एक कंडोम, यदि सही से पहना जाए, तो वह दो से कहीं ज्यादा सुरक्षित है। क्या ओरल सेक्स (Oral Sex) के दौरान भी कंडोम जरूरी है? हालांकि ओरल सेक्स से एचआईवी का खतरा कम होता है, लेकिन यह शून्य नहीं है। मुंह में छाले या मसूड़ों से खून आने की स्थिति में खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, अन्य संक्रमण जैसे हर्पीस और सिफलिस ओरल सेक्स से आसानी से फैलते हैं। इसलिए सुरक्षा के लिए कंडोम या डेंटल डैम का उपयोग करना समझदारी है। अगर कंडोम फट जाए तो क्या करना चाहिए? यदि संभोग के दौरान कंडोम फट जाता है और आपको संक्रमण का डर है, तो तुरंत (अगले 72 घंटों के भीतर) डॉक्टर से मिलें। डॉक्टर आपको PEP (Post-Exposure Prophylaxis) दवा दे सकते हैं, जो एचआईवी संक्रमण को रोकने में मदद कर सकती है।…

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