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एचआईवी वैक्सीन अनुसंधान रोकथाम ?

एचआईवी (HIV) वैक्सीन अनुसंधान और रोकथाम चिकित्सा विज्ञान के सबसे चुनौतीपूर्ण लेकिन आशाजनक क्षेत्रों में से एक है। दशकों की मेहनत के बाद, आज हम एक ऐसी वैक्सीन के करीब पहुँच रहे हैं जो इस वैश्विक महामारी को समाप्त कर सकती है।

एचआईवी वैक्सीन: वर्तमान स्थिति और अनुसंधान

वर्तमान में, बाज़ार में कोई स्वीकृत (Approved) एचआईवी वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, लेकिन mRNA टेक्नोलॉजी (जिसका उपयोग कोविड-19 वैक्सीन में किया गया था) ने इस क्षेत्र में नई जान फूंक दी है। शोधकर्ता अब ऐसी वैक्सीन पर काम कर रहे हैं जो शरीर को ब्रोडली न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज (bNAbs) बनाने के लिए उत्तेजित कर सके।

 

एचआईवी वैक्सीन बनाना इतना कठिन क्यों है?

एचआईवी अन्य वायरस की तुलना में बहुत अलग है क्योंकि:

· तेजी से म्यूटेशन: यह वायरस शरीर के अंदर बहुत तेजी से अपना रूप बदलता है।

· इम्यून सिस्टम पर हमला: यह उन्हीं कोशिकाओं (CD4 T-cells) पर हमला करता है जो शरीर की रक्षा के लिए जिम्मेदार होती हैं।

· छिपा हुआ संक्रमण: यह मानव DNA में छिप जाता है, जिससे इसे पूरी तरह खत्म करना मुश्किल होता है।

क्या वर्तमान में कोई एचआईवी वैक्सीन ट्रायल चल रहा है?

हाँ, कई क्लीनिकल ट्रायल जारी हैं। सबसे प्रमुख अनुसंधान mRNA-आधारित वैक्सीन पर हो रहा है। इसके अलावा, शोधकर्ता ‘जर्मलाइन टारगेटिंग’ (Germline targeting) नामक तकनीक का परीक्षण कर रहे हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को विशिष्ट एंटीबॉडी बनाने के लिए प्रशिक्षित करती है।

वैक्सीन न होने पर रोकथाम के अन्य प्रभावी तरीके क्या हैं?

जब तक वैक्सीन नहीं आती, ‘रोकथाम ही उपचार है’। आधुनिक चिकित्सा ने कई विकल्प दिए हैं:

· PrEP (Pre-Exposure Prophylaxis): यह उन लोगों के लिए एक दैनिक दवा है जिन्हें एचआईवी होने का उच्च जोखिम है। यह संक्रमण की संभावना को 99% तक कम कर सकती है।

· PEP (Post-Exposure Prophylaxis): असुरक्षित संपर्क के 72 घंटों के भीतर ली जाने वाली आपातकालीन दवा।

· TasP (Treatment as Prevention): 

यदि एक एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति नियमित दवा (ART) लेता है और उसका वायरल लोड “अनडिटेक्टेबल” (Undetectable) हो जाता है, तो वह संक्रमण नहीं फैला सकता (U=U: Undetectable = Untransmittable)।

क्या ‘फंक्शनल क्योर’ (Functional Cure) संभव है?

अनुसंधान का एक बड़ा हिस्सा ‘फंक्शनल क्योर’ पर केंद्रित है। इसका मतलब है कि वायरस शरीर में तो रहेगा, लेकिन उसे इस हद तक दबा दिया जाएगा कि व्यक्ति को जीवनभर दवा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वह स्वस्थ रहेगा।

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